यह अभी बेबूझ
अंधकार भी
रहस्यमय सत्य
रहते उसी के
उपजता हैं प्रकाश
नहीं प्रश्न
मिलन हो दोनों का
विपरीत सत्ता के स्वामी
अपने वर्चस्व के धनी
हार जीत का क्रम निरंतर
समय देता पहचान
कि प्रकट करे
अपना विराट स्वरूप
ओर यह प्रकृति
स्थिर भाव देखती जाती
दोनों की औकात
यह ठीक
कि अंधकार देता विश्रान्ति
अचेतन की गहरी तन्द्रा
एक नव चेतन जिन्दगी
जीने के निमित्त
साबित होता परहित मकसद
अंधकार कहां हैं भार
यह हैं चेतना की पृष्ठभूमि
जहां विकसता हैं
तेजस्विता भरा नवल प्रकाश
एक झीना विरल पर्दा
रजनी ओढती जाती
कि रश्मिया का गुम्फन
ले सके ओजस्विता का तेज
ओर देखती जाती प्रकृति
अदृश्य रंगो की रश्मिया
लेती हुई आकार
यह अंधकार दुख नही
सुख का पनपता आधार स्तंभ
जिसमें अब ले रहा
नव वर्ष भी
अपने काल का सघन विस्तार
जहां हमारे सपने
करेगे जीवन की अनंत
मनोकामनाओ का साक्षात्कार
यह अंधकार भी
जीवन की गति का
पहिया हैं
नमन नव वर्ष तुम्हें
विश्रान्ति काल से सुख
लिए आते हो।
छगन लाल गर्ग।
अंधकार भी
रहस्यमय सत्य
रहते उसी के
उपजता हैं प्रकाश
नहीं प्रश्न
मिलन हो दोनों का
विपरीत सत्ता के स्वामी
अपने वर्चस्व के धनी
हार जीत का क्रम निरंतर
समय देता पहचान
कि प्रकट करे
अपना विराट स्वरूप
ओर यह प्रकृति
स्थिर भाव देखती जाती
दोनों की औकात
यह ठीक
कि अंधकार देता विश्रान्ति
अचेतन की गहरी तन्द्रा
एक नव चेतन जिन्दगी
जीने के निमित्त
साबित होता परहित मकसद
अंधकार कहां हैं भार
यह हैं चेतना की पृष्ठभूमि
जहां विकसता हैं
तेजस्विता भरा नवल प्रकाश
एक झीना विरल पर्दा
रजनी ओढती जाती
कि रश्मिया का गुम्फन
ले सके ओजस्विता का तेज
ओर देखती जाती प्रकृति
अदृश्य रंगो की रश्मिया
लेती हुई आकार
यह अंधकार दुख नही
सुख का पनपता आधार स्तंभ
जिसमें अब ले रहा
नव वर्ष भी
अपने काल का सघन विस्तार
जहां हमारे सपने
करेगे जीवन की अनंत
मनोकामनाओ का साक्षात्कार
यह अंधकार भी
जीवन की गति का
पहिया हैं
नमन नव वर्ष तुम्हें
विश्रान्ति काल से सुख
लिए आते हो।
छगन लाल गर्ग।