ऑसू मेरे
छोड़ो भीतर
उफान घनेरा
झेल न पाऊ
दुनिया देखे
बहना छोड़ो
रहो भीतर पर
बिन देखे ही
बहना जानो
विरल हृदय
मत छोड़ो रीता
उपजो नित नित
हृदय समाओ
भाव उफानमय
झिलमिल करते
समाओ घनेरे
जीवन मेरे
आमंत्रण नहीं यह
मेरे अपने
जीवन मेरा
तरल मोती बनाओ
विपदाओ के सागर मेरे
लहरों से नित
उन्माद भरो रे
मत रहना तुम
दुख से उपजे
अति सुख मे भी
चेतन बन जाओ
व्याकुल चित मत
करो बसेरा
भाव विभाव मे
बहते जाओ
निर्मल होता
आते जब हो
विनम्र हृदय हुआ
तनिक द्वार खुलने दो
अस्तित्व बसो तुम
प्रार्थना बन जाओ
उभरो घनेरे
अलौकिक बनो रे
जीवन जब तक
बरसो जी भर
कहां जुदा हो
मेरे बने हो
मुझको नित
पिघलाते जाओ
रहे ना जरा भी
अहंकार की शिला
हिम खंड यह जीवन
पिघलाते जाओ
द्वार खोलो मेरी
पावनता का
बसू करू विश्राम घनेरा
ऑसू मेरे
हो तुम सुख देय
दुनिया ले रही
प्रतीक हैं दुख के
तुम हो विवेकी
झुठलाते जाओ
प्रभु विरह का
माध्यम रहो तुम
घेरो रे घेरो
हृदय जगत का
द्रव्य भरी इन
महिन धारो मे
मिलता दिखता
मुझे किनारा
पहुँच पहुँच हुआ हूँ
पावनधार सहारे तेरे
द्वार प्रभु तक
ऑसू मेरे
छोड़ो भीतर ।
छगन लाल गर्ग।
छोड़ो भीतर
उफान घनेरा
झेल न पाऊ
दुनिया देखे
बहना छोड़ो
रहो भीतर पर
बिन देखे ही
बहना जानो
विरल हृदय
मत छोड़ो रीता
उपजो नित नित
हृदय समाओ
भाव उफानमय
झिलमिल करते
समाओ घनेरे
जीवन मेरे
आमंत्रण नहीं यह
मेरे अपने
जीवन मेरा
तरल मोती बनाओ
विपदाओ के सागर मेरे
लहरों से नित
उन्माद भरो रे
मत रहना तुम
दुख से उपजे
अति सुख मे भी
चेतन बन जाओ
व्याकुल चित मत
करो बसेरा
भाव विभाव मे
बहते जाओ
निर्मल होता
आते जब हो
विनम्र हृदय हुआ
तनिक द्वार खुलने दो
अस्तित्व बसो तुम
प्रार्थना बन जाओ
उभरो घनेरे
अलौकिक बनो रे
जीवन जब तक
बरसो जी भर
कहां जुदा हो
मेरे बने हो
मुझको नित
पिघलाते जाओ
रहे ना जरा भी
अहंकार की शिला
हिम खंड यह जीवन
पिघलाते जाओ
द्वार खोलो मेरी
पावनता का
बसू करू विश्राम घनेरा
ऑसू मेरे
हो तुम सुख देय
दुनिया ले रही
प्रतीक हैं दुख के
तुम हो विवेकी
झुठलाते जाओ
प्रभु विरह का
माध्यम रहो तुम
घेरो रे घेरो
हृदय जगत का
द्रव्य भरी इन
महिन धारो मे
मिलता दिखता
मुझे किनारा
पहुँच पहुँच हुआ हूँ
पावनधार सहारे तेरे
द्वार प्रभु तक
ऑसू मेरे
छोड़ो भीतर ।
छगन लाल गर्ग।
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