अनजान व्यक्ति
ठिठुरता सा
राह रोकता हैं मेरी
साहब चाय पिला दो
रूका सा
ठिठुरता तन
नाम मात्र के कपडो से
अध ढका शरीर
तेज हवा का प्रहार
ठिठुरता सा देखता हूँ उसे
अचकचा जाता हैं वह
जब उतारने लगता हूँ
खुद का पहना गर्म कोट
कदम पीछे हटते उसके
देखता हूँ मैं
खुले बटन बंद करता अपने
असमझ मे हूँ
हवाऐ चिरती जाती
भीतर तक
कैसे जी लेते हैं ये लोग
ठंडी का प्रबल वेग
कैसे सह जिन्दा बसे
भीतरी हिम्मत जुटा
दे देता हूँ अपना पहना कोट
भौचक्का सा
पथराई ऑखो से देखता
ऑखो से बहते ऑसू
देखता हूँ
बिना कुछ कहे
बढता हूँ
बेठता हूँ रिक्शा
ओर सोचता जाता हूँ
मेरा यह अनुग्रह
सारी ठिठुरती जिन्दगियो के
काम आयेगा
विषमता का यह कुरूप सत्य
बिन्धता जाता
भीतर भीतर
विषम जीवन क्या
जन्म लेता हैं
कैसे मानू
कि कुछ व्यक्ति
कोट सूट पहने
जन्म लेते हैं
ओर कुछ व्यक्ति
वस्त्र विहिन ठिठुरते
क्या इस सत्य पर
कोई विद्वान अन्वेषण करेगा
फिर लेगा पी एच डी की उपाधि
प्रश्न अनुतरित हैं ।
छगन लाल गर्ग।
ठिठुरता सा
राह रोकता हैं मेरी
साहब चाय पिला दो
रूका सा
ठिठुरता तन
नाम मात्र के कपडो से
अध ढका शरीर
तेज हवा का प्रहार
ठिठुरता सा देखता हूँ उसे
अचकचा जाता हैं वह
जब उतारने लगता हूँ
खुद का पहना गर्म कोट
कदम पीछे हटते उसके
देखता हूँ मैं
खुले बटन बंद करता अपने
असमझ मे हूँ
हवाऐ चिरती जाती
भीतर तक
कैसे जी लेते हैं ये लोग
ठंडी का प्रबल वेग
कैसे सह जिन्दा बसे
भीतरी हिम्मत जुटा
दे देता हूँ अपना पहना कोट
भौचक्का सा
पथराई ऑखो से देखता
ऑखो से बहते ऑसू
देखता हूँ
बिना कुछ कहे
बढता हूँ
बेठता हूँ रिक्शा
ओर सोचता जाता हूँ
मेरा यह अनुग्रह
सारी ठिठुरती जिन्दगियो के
काम आयेगा
विषमता का यह कुरूप सत्य
बिन्धता जाता
भीतर भीतर
विषम जीवन क्या
जन्म लेता हैं
कैसे मानू
कि कुछ व्यक्ति
कोट सूट पहने
जन्म लेते हैं
ओर कुछ व्यक्ति
वस्त्र विहिन ठिठुरते
क्या इस सत्य पर
कोई विद्वान अन्वेषण करेगा
फिर लेगा पी एच डी की उपाधि
प्रश्न अनुतरित हैं ।
छगन लाल गर्ग।
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