झिझकता नहीं
कह देता हूँ
जो हूँ आवरण भीतर
चुभते हैं
वाचिग मशीन का पानी हूँ
गंदला हुआ
सामर्थ्य समाया मैल लिए
रंग बदलता सा
बहने लगा हूँ
सड़क के किनारे
परिवार के सारे कपड़े
साफ किये
गंदगी भरा हूँ
साफ़ किए कपड़े चमक देते
सुखते हैं
सूर्य रश्मियो से
निखरते चमक देने लगे हैं
ओर मैं
गंदगी पूरी लिए
बहता हूँ नीचे की ओर
काम अपनों का
अशुद्धता पहने नीचे की दिशा
अस्तित्व समाप्ति की ओर
हाथों मे झाडू लिए
सफाई करती सभ्यता रानी
देती हैं झटके झाडू के
सड़क साफ़ का उद्योग करती हुई
राष्ट्रीय सफाई अभियान की तरह
मुझमें मिली अपनों के तन कपडो की गंदगी
फैल चुकी हैं सड़क पर
सड़क को नम किए
नही हैं अब अस्तित्व मेरा
हूँ आभास मात्र
खूब हुआ उपयोग मेरा
ओर चमक देता रहा
मेरे आश्रित परिवार को
आज हुआ हूँ अशुद्ध
अस्तित्व खोया सा
उपेक्षित हूँ अपनो से
झटके झाडू के खाता
गुजारता हूँ बुढ़ापा
एक अवशेष हूँ समय का
मिटता जाता हूँ
समय के साथ ।
छगन लाल गर्ग।
कह देता हूँ
जो हूँ आवरण भीतर
चुभते हैं
वाचिग मशीन का पानी हूँ
गंदला हुआ
सामर्थ्य समाया मैल लिए
रंग बदलता सा
बहने लगा हूँ
सड़क के किनारे
परिवार के सारे कपड़े
साफ किये
गंदगी भरा हूँ
साफ़ किए कपड़े चमक देते
सुखते हैं
सूर्य रश्मियो से
निखरते चमक देने लगे हैं
ओर मैं
गंदगी पूरी लिए
बहता हूँ नीचे की ओर
काम अपनों का
अशुद्धता पहने नीचे की दिशा
अस्तित्व समाप्ति की ओर
हाथों मे झाडू लिए
सफाई करती सभ्यता रानी
देती हैं झटके झाडू के
सड़क साफ़ का उद्योग करती हुई
राष्ट्रीय सफाई अभियान की तरह
मुझमें मिली अपनों के तन कपडो की गंदगी
फैल चुकी हैं सड़क पर
सड़क को नम किए
नही हैं अब अस्तित्व मेरा
हूँ आभास मात्र
खूब हुआ उपयोग मेरा
ओर चमक देता रहा
मेरे आश्रित परिवार को
आज हुआ हूँ अशुद्ध
अस्तित्व खोया सा
उपेक्षित हूँ अपनो से
झटके झाडू के खाता
गुजारता हूँ बुढ़ापा
एक अवशेष हूँ समय का
मिटता जाता हूँ
समय के साथ ।
छगन लाल गर्ग।
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