अब यह भी
निर्धारण विवेक का
अच्छे ओर बुरे का
नहीं कोई संबंध जीवन से
अहसास भीतर का
अभिव्यक्ति भी कहां दे पाता
कि अच्छा हैं क्या
बदलाव का सत्य
सभी की एकरसता हो
संभव नहीं
पर शब्द अपने भाव
विभिन्न अर्थो को लिए
कहता गया
अपने अपने अच्छेपन को
जिसे यथार्थ का प्रवाह
नही देता अर्थ अपने
जो अच्छा लगे
असन्तुलन का यह जीवन
अच्छाई माने भी किसे
राज नेताओ का अच्छापन
बाधक हैं उनके धन्धे मे
फिर आम का जीवन
अच्छेपन की गुहार लगाये
यह ओछापन
अच्छे दिनों का इम्तिहान
क्यों हो
अब देखो ना
काटने लगे हैं मच्छर
ऊभरी हुई सडको पर
पानी का बहाव
रूकेगा ही
यह चलना ओर गिरना
दोनों रहेगा ही साथ साथ
यह अनुभव हीनता हमारी
कि गचका खाये
गिरते उठते हैं
इसमें बुरा दिन कैसे
क्या सडके पहले से नहीं
गंदी नालिया
अब बस भी करो
जिन्दगी नहीं जुडी कभी
अच्छे दिनों से
व्याख्या मे गलती हमारी
अच्छा ही हैं
कि जीवन जीते हो
यह बदोलत
अच्छे दिनों के
आने से ही तो हुआ ।
छगन लाल गर्ग।
निर्धारण विवेक का
अच्छे ओर बुरे का
नहीं कोई संबंध जीवन से
अहसास भीतर का
अभिव्यक्ति भी कहां दे पाता
कि अच्छा हैं क्या
बदलाव का सत्य
सभी की एकरसता हो
संभव नहीं
पर शब्द अपने भाव
विभिन्न अर्थो को लिए
कहता गया
अपने अपने अच्छेपन को
जिसे यथार्थ का प्रवाह
नही देता अर्थ अपने
जो अच्छा लगे
असन्तुलन का यह जीवन
अच्छाई माने भी किसे
राज नेताओ का अच्छापन
बाधक हैं उनके धन्धे मे
फिर आम का जीवन
अच्छेपन की गुहार लगाये
यह ओछापन
अच्छे दिनों का इम्तिहान
क्यों हो
अब देखो ना
काटने लगे हैं मच्छर
ऊभरी हुई सडको पर
पानी का बहाव
रूकेगा ही
यह चलना ओर गिरना
दोनों रहेगा ही साथ साथ
यह अनुभव हीनता हमारी
कि गचका खाये
गिरते उठते हैं
इसमें बुरा दिन कैसे
क्या सडके पहले से नहीं
गंदी नालिया
अब बस भी करो
जिन्दगी नहीं जुडी कभी
अच्छे दिनों से
व्याख्या मे गलती हमारी
अच्छा ही हैं
कि जीवन जीते हो
यह बदोलत
अच्छे दिनों के
आने से ही तो हुआ ।
छगन लाल गर्ग।
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