नही बहाव
सरित सा
अब रीती जिन्दगी
संताप त्याग अब
शान्त हो जा
भावना का भार
मत ले
कामना का
भंवर तज दे
शान्त सागर बन
सार पा ले
जिन्दगी अब
शान्त हो जा
अंबर सा विस्तृत
भाव ले ले
तारिका सम
रश्मि हो जा
चतुर चाल तेरी
अब त्याग दे तू
किसलय सम कोमल
चित कर ले
अंचल सम लहराये
राग तेरा
नवल मधुरस की
मुकुल गागर ढुलकने दे
जिन्दगी तू
अब शान्त हो जा
अलौकिक प्रियतम निहारे
अमंद अधरो से
स्मरण नाम ले ले
अवशेष जीवन
सार ले ले
सत्य भोगा
सत्य रह गया
झूठ का आडम्बर
हट रहा
सत्य का कुछ
सार कह दे
खिलते कुसुम की
मुस्कान भर दे
नवोदित नमन का
रसपान कर ले
निश्छल स्नेह का निर्झर
बहे रे
प्राण ऊर्जा
समाहित कर ले
संगम ससंर्ग होने को आया
निश्छल नेह के
बीज बो दे
अंकुर नव कपोल कंपित
पवन लहर भर
चंचल कर दे
प्राण रस अब
अंकुर लेता
रस पात्र रीता
लबालब भर ले
उन्माद उछले
पराग कण सा कोमल
चित तेरा
प्रियतम तन का
अवलंबन ले ले
प्राण छोड़ अब
ओर ढीला
पवन गति से
बंध प्रियतम
झूलने दे झौका बन रे
झूला प्रियतम
बन गये रे
मत सिपट अब
तन जीवन छाया
तोल खुद का
मोल रे अब तू
सत्य जीया वहीं
काम ले अब तू
मन कुसुम संग
छोड रे अब तू
अवरोध सारे
छोड रे अब तू
अनमोल पल है
तोल रे अब तू
रीती रे जिन्दगी
अब शान्त हो जा ।
छगन लाल गर्ग।
सरित सा
अब रीती जिन्दगी
संताप त्याग अब
शान्त हो जा
भावना का भार
मत ले
कामना का
भंवर तज दे
शान्त सागर बन
सार पा ले
जिन्दगी अब
शान्त हो जा
अंबर सा विस्तृत
भाव ले ले
तारिका सम
रश्मि हो जा
चतुर चाल तेरी
अब त्याग दे तू
किसलय सम कोमल
चित कर ले
अंचल सम लहराये
राग तेरा
नवल मधुरस की
मुकुल गागर ढुलकने दे
जिन्दगी तू
अब शान्त हो जा
अलौकिक प्रियतम निहारे
अमंद अधरो से
स्मरण नाम ले ले
अवशेष जीवन
सार ले ले
सत्य भोगा
सत्य रह गया
झूठ का आडम्बर
हट रहा
सत्य का कुछ
सार कह दे
खिलते कुसुम की
मुस्कान भर दे
नवोदित नमन का
रसपान कर ले
निश्छल स्नेह का निर्झर
बहे रे
प्राण ऊर्जा
समाहित कर ले
संगम ससंर्ग होने को आया
निश्छल नेह के
बीज बो दे
अंकुर नव कपोल कंपित
पवन लहर भर
चंचल कर दे
प्राण रस अब
अंकुर लेता
रस पात्र रीता
लबालब भर ले
उन्माद उछले
पराग कण सा कोमल
चित तेरा
प्रियतम तन का
अवलंबन ले ले
प्राण छोड़ अब
ओर ढीला
पवन गति से
बंध प्रियतम
झूलने दे झौका बन रे
झूला प्रियतम
बन गये रे
मत सिपट अब
तन जीवन छाया
तोल खुद का
मोल रे अब तू
सत्य जीया वहीं
काम ले अब तू
मन कुसुम संग
छोड रे अब तू
अवरोध सारे
छोड रे अब तू
अनमोल पल है
तोल रे अब तू
रीती रे जिन्दगी
अब शान्त हो जा ।
छगन लाल गर्ग।
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