अबूझ जीवन
ओर अबूझ अस्तित्व
बिहड अवरोध लिए
समय
तुझे भोगता हूँ
आगत विगत का
न कोई लेखा
न कोई मेरा हिस्सा
कि कह सकू
यह मैने किया
किस प्रेरणा
किस आसरे मैं
मेरा अस्तित्व बना
या कि बिगडा
प्रमाण क्या दू
यह आगे पिछे जो भी
होगा या हुआ
बीच मे मैं कहां हूँ
जो भी हूँ
तेरा निर्मित
हाँ ।साधन रहा
पर मेरा साध्य तू रहा
बडे नजदीकी रिस्ते रहे हमारे
पर कहां परिचय पाया मैंने
तुम्हारा
मेरे साथ पक्ष विपक्ष का
खेल खेलते रहे
पर इस खेल
केवल तुम जितते रहे
नाचता रहा मैं
जैसा तुम नचाते
जब कभी थाह लेना चाहता
तुम झटकते रहे मुझे
करारी चौट पड़ती तुम्हारी
कि तन मन का जर्रा जर्रा
घने दर्द डूब जाता
टूटी पसलियो से
करवट लेता कैसे
निन्द लेता कैसे
जब से हारे मन स्वीकारा हैं तुम्हें
समय तुम जैसे भी रहे
केवल मौन स्वीकृति तुम्हारे साथ
टोह नहीं लेता तुम्हारी
जी लेता हूँ जैसा तुम चाहो
ठावस पाया अस्तित्व
जाना समझा
समय तुम बेबूझ हो।
छगन लाल गर्ग।
ओर अबूझ अस्तित्व
बिहड अवरोध लिए
समय
तुझे भोगता हूँ
आगत विगत का
न कोई लेखा
न कोई मेरा हिस्सा
कि कह सकू
यह मैने किया
किस प्रेरणा
किस आसरे मैं
मेरा अस्तित्व बना
या कि बिगडा
प्रमाण क्या दू
यह आगे पिछे जो भी
होगा या हुआ
बीच मे मैं कहां हूँ
जो भी हूँ
तेरा निर्मित
हाँ ।साधन रहा
पर मेरा साध्य तू रहा
बडे नजदीकी रिस्ते रहे हमारे
पर कहां परिचय पाया मैंने
तुम्हारा
मेरे साथ पक्ष विपक्ष का
खेल खेलते रहे
पर इस खेल
केवल तुम जितते रहे
नाचता रहा मैं
जैसा तुम नचाते
जब कभी थाह लेना चाहता
तुम झटकते रहे मुझे
करारी चौट पड़ती तुम्हारी
कि तन मन का जर्रा जर्रा
घने दर्द डूब जाता
टूटी पसलियो से
करवट लेता कैसे
निन्द लेता कैसे
जब से हारे मन स्वीकारा हैं तुम्हें
समय तुम जैसे भी रहे
केवल मौन स्वीकृति तुम्हारे साथ
टोह नहीं लेता तुम्हारी
जी लेता हूँ जैसा तुम चाहो
ठावस पाया अस्तित्व
जाना समझा
समय तुम बेबूझ हो।
छगन लाल गर्ग।
No comments:
Post a Comment