अचानक नहीं होता
तपन झेले बिना नीर आये
वह नीर जो ताप उष्मा से परिणाम
पाया हो
ठहरे तन को ठंडा करता
अलग अहसास दिये
तस्सली पाता मन
उर्जा पाकर चेतन होता
प्रखर ताप तब आमन्त्रित करता
फिर फिर तपने को
कि सार बन जाता जीवन
पग पग गाता जीवन
ताप की उर्जा
अब जलना भी रोशनी हैं ।
छगन लाल गर्ग।
तपन झेले बिना नीर आये
वह नीर जो ताप उष्मा से परिणाम
पाया हो
ठहरे तन को ठंडा करता
अलग अहसास दिये
तस्सली पाता मन
उर्जा पाकर चेतन होता
प्रखर ताप तब आमन्त्रित करता
फिर फिर तपने को
कि सार बन जाता जीवन
पग पग गाता जीवन
ताप की उर्जा
अब जलना भी रोशनी हैं ।
छगन लाल गर्ग।
No comments:
Post a Comment