राग चेतन रहो
खण्डित अस्तित्व सच हैं
यह कसक भीतरी
बाहर मत लाओ
आस्था जीवन
फासला असीम घना
सामर्थ्य बटोरते जियो
विराग राग की दशा
तहो पड़ी हैं
उतरो भीतर
कहीं होगा कतरा रश्मि
पैनी धार दो
प्राण राग घनीभूत होने दो
ढूँढो क्षण
कोलाहल भीतरी
बिना प्रयास
शान्त होने दो
रूको धैर्य मत जाने दो
आने दो
रश्मि कतरा आता हैं
पकडने की जिद्द छोडो
स्वतः प्रवेश होने दो
काफी हैं
क्षणिक ही यह
तम भीगा जीवन
पल को ही
रश्मि कतरे नहाने दो
खण्डित जीवन मेरा
निष्प्राण ही हो जाने दो
अनजाना स्वर उभरता
भीतर भीतर
उभरने दो
शिथिल होते स्वीकारो उसे
स्वीकृति यही
चेतन रूप लेती
आस्था पाती फिर फिर
उर्जा तुम्हारी
मत जाने दो
चेतना आ जाने दो।
छगन लाल गर्ग।
खण्डित अस्तित्व सच हैं
यह कसक भीतरी
बाहर मत लाओ
आस्था जीवन
फासला असीम घना
सामर्थ्य बटोरते जियो
विराग राग की दशा
तहो पड़ी हैं
उतरो भीतर
कहीं होगा कतरा रश्मि
पैनी धार दो
प्राण राग घनीभूत होने दो
ढूँढो क्षण
कोलाहल भीतरी
बिना प्रयास
शान्त होने दो
रूको धैर्य मत जाने दो
आने दो
रश्मि कतरा आता हैं
पकडने की जिद्द छोडो
स्वतः प्रवेश होने दो
काफी हैं
क्षणिक ही यह
तम भीगा जीवन
पल को ही
रश्मि कतरे नहाने दो
खण्डित जीवन मेरा
निष्प्राण ही हो जाने दो
अनजाना स्वर उभरता
भीतर भीतर
उभरने दो
शिथिल होते स्वीकारो उसे
स्वीकृति यही
चेतन रूप लेती
आस्था पाती फिर फिर
उर्जा तुम्हारी
मत जाने दो
चेतना आ जाने दो।
छगन लाल गर्ग।
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