पिडलियो की दुखती तंरग नीचे पहुँच बाधक बनी हैं
चलने मे
निश्वास लेता बैठता हूँ सड़क किनारे बनी मुडेर पर
झनझनाहट महसूसता हूँ तन ओर मन मे
हिलता हुआ लगता मानव संघर्ष की तरह
धूप गहराती जाती हैं पर धूप की प्रखरता से अधिक
विचारों की धूप प्रखरता से तपन देती हैं
चौकता हूँ आवाज सचेत करती हुई
युवा दुखते पैरो पर झुका हैं
हाँ ।पहचाना चेहरा दस वर्ष पहले का शिष्य मेरा
उदास गमगीन थका थका सा टुटा टुटा सा बल लगा मुस्काता हुआ
सर।नहीं पहचाना मैं विवेक आपका स्टुडेन्ट
कैसे हो कहां हो क्या करते हो
प्रश्नो की बौछार से चेहरे की क्षणिक प्रसन्नता लुप्त होती पाता हूँ
बेरोजगार हूँ सर थका हारा जबाव
दस साल हुए सर हर बार नकारा गया हूँ
टयूशन क्लाशेज फार्मस परीक्षा मे बर्बाद हूँ
बीबी बच्चे ससुराल ही रहते हैं
नोट्स लेने शहर आया था लेक्चर की वेकेन्सी आई हैं
हौसला देता हूँ मैं ठीक वहीं स्टाईल जो क्लास मे होती थी
शिष्य चल देता हैं मेरे पिण्डली का दर्द विलय होता सा
युवाओं की विवशता मे समा जाता हैं
सोचता हूँ हर बार बोर्ड मे अच्छे रहे लडके जिन्दगी मे पीछे क्यों
परीक्षा परिणाम बाद भी नोकरी क्यों नहीं
इस नयी पौध का भावी क्या गर्त धकेला जाता हैं
दर्द नाईलाज हैं ठीक मेरे पिडली दर्द की तरह।
छगन लाल गर्ग।
चलने मे
निश्वास लेता बैठता हूँ सड़क किनारे बनी मुडेर पर
झनझनाहट महसूसता हूँ तन ओर मन मे
हिलता हुआ लगता मानव संघर्ष की तरह
धूप गहराती जाती हैं पर धूप की प्रखरता से अधिक
विचारों की धूप प्रखरता से तपन देती हैं
चौकता हूँ आवाज सचेत करती हुई
युवा दुखते पैरो पर झुका हैं
हाँ ।पहचाना चेहरा दस वर्ष पहले का शिष्य मेरा
उदास गमगीन थका थका सा टुटा टुटा सा बल लगा मुस्काता हुआ
सर।नहीं पहचाना मैं विवेक आपका स्टुडेन्ट
कैसे हो कहां हो क्या करते हो
प्रश्नो की बौछार से चेहरे की क्षणिक प्रसन्नता लुप्त होती पाता हूँ
बेरोजगार हूँ सर थका हारा जबाव
दस साल हुए सर हर बार नकारा गया हूँ
टयूशन क्लाशेज फार्मस परीक्षा मे बर्बाद हूँ
बीबी बच्चे ससुराल ही रहते हैं
नोट्स लेने शहर आया था लेक्चर की वेकेन्सी आई हैं
हौसला देता हूँ मैं ठीक वहीं स्टाईल जो क्लास मे होती थी
शिष्य चल देता हैं मेरे पिण्डली का दर्द विलय होता सा
युवाओं की विवशता मे समा जाता हैं
सोचता हूँ हर बार बोर्ड मे अच्छे रहे लडके जिन्दगी मे पीछे क्यों
परीक्षा परिणाम बाद भी नोकरी क्यों नहीं
इस नयी पौध का भावी क्या गर्त धकेला जाता हैं
दर्द नाईलाज हैं ठीक मेरे पिडली दर्द की तरह।
छगन लाल गर्ग।
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