यह पुलिया नदी से उपर उठा मुझे अवसर देता
कि बिना संघर्ष पानी नदी पार करू
किनारा पाये आगे बढू मंजिल की ओर
निगाहे उठा देखता हूँ गहराई ओर विस्तार पाया बहता नीर
बढता जाता गतिमय मंजिल की ओर
बेबाध हैं देखता हूँ भागता हुआ अभी अभी
समय ओर सभ्यता सुनता हूँ बाधक होती उसके सपनो मे
प्रखर ताप सोखता जाता जीवन उसका
ओर इन्सान रोकता जाता अपनी गरज बान्ध बनाकर
अंश ही पाता मंजिल सागर विलय
फिर देखता मेरा जीवन मोहताज बना ओरो का पग पग सरकता ऐ
कि बिना संघर्ष पानी नदी पार करू
किनारा पाये आगे बढू मंजिल की ओर
निगाहे उठा देखता हूँ गहराई ओर विस्तार पाया बहता नीर
बढता जाता गतिमय मंजिल की ओर
बेबाध हैं देखता हूँ भागता हुआ अभी अभी
समय ओर सभ्यता सुनता हूँ बाधक होती उसके सपनो मे
प्रखर ताप सोखता जाता जीवन उसका
ओर इन्सान रोकता जाता अपनी गरज बान्ध बनाकर
अंश ही पाता मंजिल सागर विलय
फिर देखता मेरा जीवन मोहताज बना ओरो का पग पग सरकता ऐ
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