Friday, 23 October 2015

अब ठीक हैं ।

थोड़ी तस्सली लगती हैं
कुछ ठीक महसूस करता हूँ
अच्छा रहा
कद्र मिली बुलाया तो हैं
चाहे व्यवसायिक इस्तेमाल ही क्यों न हो
ऑफिस अलग की हैं बेटे ने
रीडर से लेकर मजिस्ट्रेट तक
आदर देते हैं
बडे आत्मीय मिले
बताते हैं
सुबह से वकील साहब से पूछते हैं
आपका
कहां हैं फादर
मैं उतर ढूँढ ता हूँ
कैसे कहूँ कि मुझे कहा तक नहीं
अब वजह मुझे नहीं ढूँढनी पडी
बेटे ने बताया
मोबाइल बीजी था पप्पा का
संतुलित होता हूँ मैं
सोचता हूँ
रक्तिल रिश्तों की गहराई
अब मात्र बनावट
फिर भी अच्छा लगता हैं
चलो।अब ठीक हैं ।
छगन लाल गर्ग।

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