सपने थके हैं मेरे
गहन चेतना के छीटे
गिरे हैं अभी
भिगा सा झुंझलाया सा
असंतुलित जगा हूँ मैं
लावण्य मदभरा हृदय
इस पल टूट बिखरा सा हैं
कतरे कतरे धुन्ध
रश्मि खोयी सी हैं
भरे भरे लम्हे
करूण किरनो संग
क्षुब्ध तंरगो मिल
स्तब्ध हैं
व्यथा गागर
छिद्र पाता बहा भी हैं
प्रिय मत आओ
डोर रश्मि
परमाणु हल्का
नेह लिपटा
अन्तराल गहरा
गर्त गहरे डूबना भी हैं
गात कोमल भाव गहरे
कामना राह हैं दुर्गम
विरह तन जल
धुआँ घना हैं
नीर नैनो भरा घना हैं
रोशनी नहीं काम आती
काजल कालिमा
बन बहा नहीं हैं
मिलन शब्द लब आये कैसे
सपने मेरे
थक गये हैं
पुलक अब तो एक बाकी
देह ले विश्राम बाकी
प्राण नेह मिल संग हो ले
दिव्यता का रस पी ले
नद नीर प्रवाह ले ले
गहन नेह विश्राम कर ले
शिथिल जीवन
सार पा ले
देख रे अब रात गहरी
टिमटिमाता दीप तार बाकी
जोड रश्मि लौ बुझे तक
नेह दे पुकार जब तक
लम्हे समझ ले प्राण तू अब
चेतना का राग ले अब
भर दे रीते भाव तू अब
रहा वेदना का गान अब तो
गा विरह का गान फिर फिर
सपने थक गये हैं मेरे ।
छगन लाल गर्ग।
गहन चेतना के छीटे
गिरे हैं अभी
भिगा सा झुंझलाया सा
असंतुलित जगा हूँ मैं
लावण्य मदभरा हृदय
इस पल टूट बिखरा सा हैं
कतरे कतरे धुन्ध
रश्मि खोयी सी हैं
भरे भरे लम्हे
करूण किरनो संग
क्षुब्ध तंरगो मिल
स्तब्ध हैं
व्यथा गागर
छिद्र पाता बहा भी हैं
प्रिय मत आओ
डोर रश्मि
परमाणु हल्का
नेह लिपटा
अन्तराल गहरा
गर्त गहरे डूबना भी हैं
गात कोमल भाव गहरे
कामना राह हैं दुर्गम
विरह तन जल
धुआँ घना हैं
नीर नैनो भरा घना हैं
रोशनी नहीं काम आती
काजल कालिमा
बन बहा नहीं हैं
मिलन शब्द लब आये कैसे
सपने मेरे
थक गये हैं
पुलक अब तो एक बाकी
देह ले विश्राम बाकी
प्राण नेह मिल संग हो ले
दिव्यता का रस पी ले
नद नीर प्रवाह ले ले
गहन नेह विश्राम कर ले
शिथिल जीवन
सार पा ले
देख रे अब रात गहरी
टिमटिमाता दीप तार बाकी
जोड रश्मि लौ बुझे तक
नेह दे पुकार जब तक
लम्हे समझ ले प्राण तू अब
चेतना का राग ले अब
भर दे रीते भाव तू अब
रहा वेदना का गान अब तो
गा विरह का गान फिर फिर
सपने थक गये हैं मेरे ।
छगन लाल गर्ग।
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