निकलता जाता
अथाह भ्रम सागर से उठाता हुआ सिर
भीतर की ओर
जहां कई अपरिचित भावों के चेहरे
कुंडली मारे जमा हैं
आकार विमोह करते
कुछ लुभाते बुलाते से
अधिकांश भय देते
अपरिचित हूँ
दबदबा इनका जीवन पर
चलते चलाते हैं मुझे
बिना अपनत्व सरकता हैं
ढलान की ओर
जीवन मेरा
प्रज्ञा की रश्मिया किनारा करती
चुप रहती सरकती जाती
विपरीत दिशा
तृष्णा का विकृत चेहरा
झंकझोरता मुझे
ओर ले चलता विकल्पो की तलाश
मृग तृष्णा बिहड विरान
शून्य बन टकराता जाता
कठोर शैल
बिखर बिखर जाता
अस्तित्व का पुलिन्दा
गदराई मोहक आकाक्षा संकेत करती
इठलाती रस देती वाणी स्वर
फिर फिर बुलाती
भ्रमित अस्तित्व मोहिनी मंत्र फसा
गिरता जाता फिर गर्त नये
पहचान प्रवृत्ति स्वप्नवत जीता
क्षण भंगुर जीवन
अन्वेषण भीतर का
बहुत कसक भरा निरर्थक
सार विलग हुआ अतीत
सत्य असत्य बीच का अन्वेषण
मेरे जीवन
अंततः अनजाना रहा हैं
प्रयास ही शब्द का अर्थ हैं ।
छगन लाल गर्ग।
अथाह भ्रम सागर से उठाता हुआ सिर
भीतर की ओर
जहां कई अपरिचित भावों के चेहरे
कुंडली मारे जमा हैं
आकार विमोह करते
कुछ लुभाते बुलाते से
अधिकांश भय देते
अपरिचित हूँ
दबदबा इनका जीवन पर
चलते चलाते हैं मुझे
बिना अपनत्व सरकता हैं
ढलान की ओर
जीवन मेरा
प्रज्ञा की रश्मिया किनारा करती
चुप रहती सरकती जाती
विपरीत दिशा
तृष्णा का विकृत चेहरा
झंकझोरता मुझे
ओर ले चलता विकल्पो की तलाश
मृग तृष्णा बिहड विरान
शून्य बन टकराता जाता
कठोर शैल
बिखर बिखर जाता
अस्तित्व का पुलिन्दा
गदराई मोहक आकाक्षा संकेत करती
इठलाती रस देती वाणी स्वर
फिर फिर बुलाती
भ्रमित अस्तित्व मोहिनी मंत्र फसा
गिरता जाता फिर गर्त नये
पहचान प्रवृत्ति स्वप्नवत जीता
क्षण भंगुर जीवन
अन्वेषण भीतर का
बहुत कसक भरा निरर्थक
सार विलग हुआ अतीत
सत्य असत्य बीच का अन्वेषण
मेरे जीवन
अंततः अनजाना रहा हैं
प्रयास ही शब्द का अर्थ हैं ।
छगन लाल गर्ग।
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