अब सोने दो इन्हें
शिथिल रूग्ण तन घना
चौट मस्तिष्क खाया
प्राण रोते होंगे
टकटकी बान्धे भीतर निहारने दो
रूदन यह अदृश्य प्रकृति बीच
पवन सा अचेतन घेरता हैं
घिर घिर घना हो जाने दो
भ्रम अंबार भाव भीगता हमारा
पल संवेदना राग उभरे
भीतरी पावन भावों से निखरने दो
निखरा रूप भीतरी आद्रता हैं
यह पावन दरिया भीतर रहने दो
मानव अस्तित्व का का यह दीप
अपनी रोशनी टिमटिमाने दो
विकारहीन पावनता लिए अस्तित्व
खुली ऑखो से निकलने दो
लो दृश्य चेतना मे जीओ
जीवन नद पहुँचा मुहाने
खटके आत्मा खटकने दो
चाहत जीए दुनिया
अछूती जीए तो जीने दो
प्रार्थना स्वर पीघले अदृश्य हुए
प्रातः सौन्दर्य नहीं ध्वनि राग
सोती हैं सामर्थ्य सीमा सोने दो
यात्रा पूरी दोष प्रतिकार मत कहो
हमारी हैं दशा सारी
ओरो की मत कहो
ईश्वरीय गणित हैं यह
मस्तिष्क गूम्फन भंवर सा
व्याख्या रहने दो
रूदन रागिनी समाया हृदय मेरा
विकसित चेतन अंकुर फूटता
चेतन राग अबोध सा बहने दो
मौन मुखर एकाग्र हैं चित
लीन हुआ महाविलय
निश्छल राग बनी प्रार्थना
दुआओ का भीतरी काफिला चेतन हैं
अदृश्य शक्ति संग सरकता सरकने दो।
छगन लाल गर्ग।
शिथिल रूग्ण तन घना
चौट मस्तिष्क खाया
प्राण रोते होंगे
टकटकी बान्धे भीतर निहारने दो
रूदन यह अदृश्य प्रकृति बीच
पवन सा अचेतन घेरता हैं
घिर घिर घना हो जाने दो
भ्रम अंबार भाव भीगता हमारा
पल संवेदना राग उभरे
भीतरी पावन भावों से निखरने दो
निखरा रूप भीतरी आद्रता हैं
यह पावन दरिया भीतर रहने दो
मानव अस्तित्व का का यह दीप
अपनी रोशनी टिमटिमाने दो
विकारहीन पावनता लिए अस्तित्व
खुली ऑखो से निकलने दो
लो दृश्य चेतना मे जीओ
जीवन नद पहुँचा मुहाने
खटके आत्मा खटकने दो
चाहत जीए दुनिया
अछूती जीए तो जीने दो
प्रार्थना स्वर पीघले अदृश्य हुए
प्रातः सौन्दर्य नहीं ध्वनि राग
सोती हैं सामर्थ्य सीमा सोने दो
यात्रा पूरी दोष प्रतिकार मत कहो
हमारी हैं दशा सारी
ओरो की मत कहो
ईश्वरीय गणित हैं यह
मस्तिष्क गूम्फन भंवर सा
व्याख्या रहने दो
रूदन रागिनी समाया हृदय मेरा
विकसित चेतन अंकुर फूटता
चेतन राग अबोध सा बहने दो
मौन मुखर एकाग्र हैं चित
लीन हुआ महाविलय
निश्छल राग बनी प्रार्थना
दुआओ का भीतरी काफिला चेतन हैं
अदृश्य शक्ति संग सरकता सरकने दो।
छगन लाल गर्ग।
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