तिनका हूँ मैं
भावनाओं की नदी का
बहाव तेज
दौडती हैं पागल नदी
घना उन्माद लिए
आस पास के मर्यादित किनारे
ढहाती बहती जाती
प्रबल वेगमय
उतावलापन झलकता जाता
एकलय होने को असीम से
भावूक आवेग देता हैं प्रगाढता
प्रेम की
नेह नीर नाहक तिनका हूँ मैं
रोकना चाहता हूँ यह
भावो का बहाव
कूदा हूँ विवेक का संघर्ष लिए
बहती भाव धारा बीच
रोकना चाहू बार बार
बुद्धि बल के हथकण्डो से
बाधक आडा अस्तित्व लिए
जूटा हूँ संघर्ष रत हूँ
बुद्धि हथियार लेकर
बड़ा कठिन महसूसता हूँ
स्वयं की अस्मिता
आश्वस्त हूँ
नकारा परिणामों से भी
भावना के आवेग का
प्रतिरोधी हूँ मैं
पर भाव नदी बहा ले जाती मुझे
अपनी दिशा
नकारती हुई अस्तित्व मेरा
असमझ की पराकाष्ठा हूँ मैं
बहता ही जाता मायिक वेग मे
अबाधित नदी के जीवन प्रवाह के साथ
रोकना रूकना हाथ कहां मेरे
स्वीकारना होगा कटु सत्य
जीवन मेरे
कि तिनका हूँ मैं ।
छगन लाल गर्ग।
भावनाओं की नदी का
बहाव तेज
दौडती हैं पागल नदी
घना उन्माद लिए
आस पास के मर्यादित किनारे
ढहाती बहती जाती
प्रबल वेगमय
उतावलापन झलकता जाता
एकलय होने को असीम से
भावूक आवेग देता हैं प्रगाढता
प्रेम की
नेह नीर नाहक तिनका हूँ मैं
रोकना चाहता हूँ यह
भावो का बहाव
कूदा हूँ विवेक का संघर्ष लिए
बहती भाव धारा बीच
रोकना चाहू बार बार
बुद्धि बल के हथकण्डो से
बाधक आडा अस्तित्व लिए
जूटा हूँ संघर्ष रत हूँ
बुद्धि हथियार लेकर
बड़ा कठिन महसूसता हूँ
स्वयं की अस्मिता
आश्वस्त हूँ
नकारा परिणामों से भी
भावना के आवेग का
प्रतिरोधी हूँ मैं
पर भाव नदी बहा ले जाती मुझे
अपनी दिशा
नकारती हुई अस्तित्व मेरा
असमझ की पराकाष्ठा हूँ मैं
बहता ही जाता मायिक वेग मे
अबाधित नदी के जीवन प्रवाह के साथ
रोकना रूकना हाथ कहां मेरे
स्वीकारना होगा कटु सत्य
जीवन मेरे
कि तिनका हूँ मैं ।
छगन लाल गर्ग।
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